EEG Test in Hindi: ईईजी टेस्ट का उद्देश्य, प्रक्रिया, तैयारी और रिपोर्ट

Bookmerilab/General Wellness/

ईईजी (EEG) परीक्षण या इलेक्ट्रोएन्सेफालोग्राफी (electroencephalography) हमारे मस्तिष्क के अंदर सभी विद्युतीय संकेतों (electrical signals) को मापने का कार्य करता है। यह मिर्गी या दौरे जैसे दिमागी अव्यवस्था के मूल्यांकन के लिए सहायक है। ईईजी (EEG) टेस्ट की कीमत भारत में 1500 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक है।

हमारे मस्तिष्क के अंदर अरबों नसे कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें न्यूरॉन्स (neurons) कहा जाता है। ये सभी न्यूरॉन्स एक दूसरे के साथ विद्युत संकेतों के माध्यम से बातचीत करती हैं। और ये संकेत ईईजी परीक्षण पर लेहरो के रूप में दिखाई देते हैं। और मिर्गी जैसे मस्तिष्क संबंधी समस्याओ में एक असामान्य तरंग पैटर्न पैदा करते हैं।

ईईजी टेस्ट का उद्देश्य
ईईजी टेस्ट का उद्देश्य

ईईजी कब करवाना चाहिए?

ईईजी (EEG – Electroencephalogram) दिमाग की विद्युत गतिविधि (Brain’s electrical activity) को मापने वाली जांच है। इस टेस्ट में सिर पर छोटे-छोटे इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जो दिमाग से निकलने वाले संकेतों (Brain waves) को रिकॉर्ड करते हैं। इससे डॉक्टर को पता चलता है कि दिमाग सामान्य तरीके से काम कर रहा है या उसमें कोई गड़बड़ी है।

यह जांच बिल्कुल दर्दरहित और सुरक्षित होती है। लेकिन हर व्यक्ति को इसकी ज़रूरत नहीं होती। डॉक्टर खास परिस्थितियों में ही ईईजी करवाने की सलाह देते हैं।

आइए विस्तार से समझते हैं कि ईईजी कब करवाना चाहिए।

1. बार-बार दौरे (Seizures) पड़ने पर

  • अगर किसी व्यक्ति को बार-बार दौरे आते हैं, तो डॉक्टर ईईजी करवाने की सलाह देते हैं।
  • यह जांच बताती है कि दौरे मिर्गी (Epilepsy) के कारण हैं या किसी और वजह से।
  • ईईजी से दौरे के दौरान दिमाग की तरंगों में होने वाले बदलाव रिकॉर्ड हो जाते हैं।

2. मिर्गी के इलाज में निगरानी के लिए

  • जिन मरीजों का मिर्गी का इलाज चल रहा है, उनमें दवा सही असर कर रही है या नहीं, यह जानने के लिए भी ईईजी करवाया जाता है।
  • कई बार डॉक्टर दवा बदलने या उसकी मात्रा तय करने के लिए भी ईईजी रिपोर्ट देखते हैं।

3. बेहोशी या चेतना की समस्या में

  • अगर किसी मरीज को बार-बार बेहोशी आती है या लंबे समय तक होश नहीं रहता, तो ईईजी मददगार होता है।
  • यह जांच बताती है कि दिमाग किस हद तक सक्रिय है।
  • कोमा (Coma) में पड़े मरीजों की स्थिति समझने के लिए भी ईईजी का इस्तेमाल किया जाता है।

4. नींद से जुड़ी परेशानियों में

  • ईईजी नींद संबंधी रोगों (Sleep Disorders) जैसे –
    • नींद में चलना
    • नींद का दौरा (Narcolepsy)
    • नींद का रुक-रुक कर टूटना (Sleep Apnea)
      की पहचान करने में मदद करता है।
  • कई बार ईईजी नींद की रिकॉर्डिंग (Sleep EEG) के साथ करवाया जाता है।

5. सिर में चोट लगने के बाद

  • सिर पर गंभीर चोट लगने से दिमाग की गतिविधि प्रभावित हो सकती है।
  • ऐसे मामलों में ईईजी करवाने से पता चलता है कि दिमाग सही तरह काम कर रहा है या नहीं।

6. ब्रेन ट्यूमर या स्ट्रोक के मामलों में

  • ईईजी सीधे – सीधे ट्यूमर नहीं दिखाता, लेकिन यह बता सकता है कि ट्यूमर या स्ट्रोक से दिमाग की लहरों में बदलाव आया है या नहीं।
  • इससे डॉक्टर को रोग की गंभीरता समझने और आगे की जांच (जैसे MRI/CT Scan) तय करने में मदद मिलती है।

7. अजीब हरकतें या व्यवहार में बदलाव

  • कभी – कभी लोग अचानक अजीब हरकतें करने लगते हैं, जैसे –
    • बिना वजह हाथ – पैर हिलाना
    • अचानक ध्यान खो देना
    • बार-बार भ्रम (Hallucination) होना
  • इन लक्षणों की वजह मिर्गी, मानसिक बीमारी या दिमागी समस्या हो सकती है।
  • ऐसे मामलों में ईईजी करवाना ज़रूरी हो जाता है।

8. बच्चों में विकास संबंधी समस्या

  • अगर बच्चा सामान्य रूप से नहीं बोल पा रहा, बार – बार ध्यान खो देता है या असामान्य हरकतें करता है, तो डॉक्टर ईईजी लिख सकते हैं।
  • यह जांच बताती है कि समस्या दिमाग से जुड़ी है या किसी और कारण से।

9. अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया के मामलों में

  • बुजुर्गों में भूलने की बीमारी (Dementia, Alzheimer’s) में ईईजी कभी-कभी सहायक होता है।
  • यह दिखाता है कि दिमाग की गतिविधि सामान्य है या उसमें गिरावट आ रही है।

10. बिना वजह सिर दर्द या चक्कर आना

  • अगर सिर दर्द लंबे समय तक बना रहे और सामान्य जांचों से कारण पता न चले, तो डॉक्टर ईईजी लिख सकते हैं।
  • लगातार चक्कर आना या बेहोशी जैसी समस्याओं में भी यह जांच की जाती है।

ईईजी टेस्ट की तैयारी कैसे करें

ईईजी (Electroencephalogram) टेस्ट दिमाग की तरंगों को मापने के लिए किया जाता है। यह पूरी तरह सुरक्षित और बिना दर्द का टेस्ट है, लेकिन इसे सही और सटीक बनाने के लिए पहले से कुछ तैयारियां करना ज़रूरी होता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि ईईजी टेस्ट की तैयारी कैसे करनी चाहिए।

1. बालों और सिर की सफाई

ईईजी में इलेक्ट्रोड सीधे खोपड़ी पर लगाए जाते हैं। अगर सिर पर तेल, कंडीशनर या हेयर प्रोडक्ट लगा हो तो इलेक्ट्रोड ठीक से नहीं चिपकते।

  • टेस्ट से एक दिन पहले या उसी दिन बाल धोकर जाएं।
  • तेल, जेल, स्प्रे या क्रीम का इस्तेमाल न करें।
  • सिर साफ और सूखा होना चाहिए।

2. दवाइयों की जानकारी

कई मरीज न्यूरोलॉजी या मानसिक स्वास्थ्य की दवाइयाँ ले रहे होते हैं।

  • टेस्ट से पहले डॉक्टर को सभी दवाइयों की जानकारी दें।
  • कुछ दवाइयाँ दिमाग की तरंगों को प्रभावित करती हैं।
  • डॉक्टर बताएंगे कौन सी दवा जारी रखनी है और कौन सी रोकनी है।
  • बिना सलाह के दवा बंद न करें।

3. नींद से जुड़ी तैयारी

कुछ मामलों में “स्लीप ईईजी” की ज़रूरत होती है।

  • डॉक्टर मरीज से कहते हैं कि रातभर कम सोएं ताकि टेस्ट के समय नींद आ सके।
  • नींद में दिमाग की तरंगें अलग तरह से रिकॉर्ड होती हैं।
  • नींद पूरी तरह न लेने से रिपोर्ट अधिक सटीक बन सकती है।

4. भोजन और कैफीन से परहेज़

ईईजी से पहले खाने-पीने की आदत भी मायने रखती है।

  • टेस्ट के दिन हल्का नाश्ता या भोजन करें।
  • बिल्कुल खाली पेट न जाएं, वरना चक्कर आ सकते हैं।
  • कैफीन वाली चीज़ें (कॉफी, चाय, चॉकलेट, एनर्जी ड्रिंक) टेस्ट से 8 – 12 घंटे पहले तक न लें।
  • कैफीन दिमाग को उत्तेजित करता है और तरंगों को बिगाड़ सकता है।

5. पहनावे का ध्यान

कपड़े और एक्सेसरीज़ भी टेस्ट पर असर डाल सकते हैं।

  • आरामदायक ढीले कपड़े पहनें।
  • सिर और कान पर मेटल (बालियां, चेन, क्लिप, पिन) न लगाएं।
  • चेहरे और बालों पर लोशन, मेकअप या स्प्रे का उपयोग न करें।

6. बच्चों की तैयारी

छोटे बच्चों का ईईजी करवाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

  • उन्हें पहले से समझाएं कि यह टेस्ट बिल्कुल दर्दरहित है।
  • बच्चे को शांत और रिलैक्स रखने की कोशिश करें।
  • अगर बच्चा बहुत घबराए तो डॉक्टर हल्की दवा देकर सुला सकते हैं।

7. मानसिक रूप से तैयार रहना

ईईजी के दौरान मरीज को लेटे रहना होता है।

  • कोशिश करें कि टेस्ट के समय शांत और स्थिर रहें।
  • घबराहट या तनाव से दिमाग की तरंगों में गड़बड़ी आ सकती है।
  • रिलैक्सेशन या गहरी सांस लेने से मन शांत होता है।

8. डॉक्टर के विशेष निर्देश

हर मरीज की स्थिति अलग होती है।

  • डॉक्टर कभी-कभी विशेष निर्देश देते हैं, जैसे नींद कम लेना या कोई खास दवा रोकना।
  • इन निर्देशों का पालन करना ज़रूरी है, वरना रिपोर्ट गलत हो सकती है।

9. सही तैयारी का महत्व

ईईजी की तैयारी सिर्फ औपचारिकता नहीं है।

  • गलत तैयारी से रिपोर्ट दोहरानी पड़ सकती है।
  • इससे समय और पैसे की बर्बादी होती है।
  • तैयारी पूरी होने पर टेस्ट आराम से हो जाता है और परिणाम सटीक मिलते हैं।

संक्षेप में परीक्षण विवरण:-

ईईजी को इस  रूप में भी जाना जाता हैइलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राफी(electroencephalography)                 
उद्देश्‍यमिर्गी जैसे मस्तिष्क विकारों का पता लगाना
कीमत1500 रुपये से 2500 रुपये
तैयारीबालों और स्कैल्प को अच्छी तरह से धोना  चाहिए। बालों में  तेल या कोई अन्य उत्पाद नहीं  होने चाहिए। 
अवधि45 मिनट से 2 घंटे
रिपोर्ट समय  24 घंटे से लेकर कुछ दिनों तक

ईईजी टेस्ट की लागत

ईईजी टेस्ट की कीमत आमतौर पर 1500 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक होती है। इसकी वास्तविक कीमत डायग्नोस्टिक सेंटर और शहर पर निर्भर करती है। बुकमेरिलाब ने पूरे भारत में 200 से अधिक डायग्नोस्टिक केंद्रों के साथ साझेदारी की है। हम चिकित्सा निदान परीक्षणों पर 10-50% की छूट प्रदान करते हैं।

कुछ लोकप्रिय डायग्नोस्टिक केंद्रों पर ईईजी (EEG) की मूल्य सूची नीचे दी गई है।

लैब का नामपरीक्षण मूल्य
Aarthi ScansRs 1400
Mahajan ImagingRs 3000
Vijaya DiagnosticsRs 2500
Suraksha DiagnosticRs 2800
NM MedicalRs 1800
FOCUS Diagnostic CentreRs 2500
ईईजी टेस्ट की लागत

विभिन्न शहरों में लागत

नीचे दी गई तालिका में विभिन्न शहरों में कीमतों की सूची दी गई है। डायग्नोस्टिक केंद्रों की कीमत और छूट के साथ उनकी सूची प्राप्त करने के लिए आप शहर के नाम पर क्लिक कर सकते हैं।

शहरपरीक्षण मूल्य
EEG Test in DelhiRs 990 to Rs 2000
EEG Test in MumbaiRs 1260 to Rs 2500
EEG Test in BangaloreRs 1260 to Rs 2000
EEG Test in HyderabadRs 1260 to Rs 1400
EEG Test in GurgaonRs 1260 to Rs 2500
EEG Test in ChennaiRs 1260 to Rs 1400
EEG Test in KolkataRs 1300 to Rs 1600
विभिन्न शहरों में लागत
ईईजी परीक्षण इंफ़ोग्राफ़िक
ईईजी परीक्षण इंफ़ोग्राफ़िक

ईईजी टेस्ट का उद्देश्य

एक ईईजी परीक्षण विद्युत गति और आवेगों को मापता है। ये हमारे मस्तिष्क से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के पता लगाने में सहायक होते हैं। कुछ समस्याऐ जिनका पता लगाया जा सकता है। जैसे:-

  • दौरा पडना
  • नींद संबंधी समस्या
  • याददाश्त कमजोर होने की समस्या
  • पागलपन
  • मस्तिष्क मे सूजन (Encephalitis)

लंबे समय से कोमा में रहने वाले रोगियों में ब्रेन डेथ की पुष्टि के लिए ईईजी का उपयोग भी किया जा सकता है।

ईईजी टेस्ट की प्रक्रिया

ईईजी परीक्षण प्रक्रिया एक सरल, दर्द रहित और गैर-आक्रामक परीक्षण है। जिसमें कोई जोखिम शामिल नहीं है। चरण-दर-चरण प्रक्रिया नीचे समझाई गई है।

  • इसकी प्रक्रिया सर के चिह्नित क्षेत्रों को साफ़ करके इलेक्ट्रोड लगाने की तैयारी के साथ शुरू होती है।
  •  इलेक्ट्रोड स्वयं छोटे लोचदार कैप्स के अंदर रखे जाते हैं।
  • इन इलेक्ट्रोड्स (लगभग 16 से 25) को फिर खोपड़ी के ऊपर रखा जाता है। ताकि सिर के सभी क्षेत्रों से समान जानकारी एकत्र की जा सके। इसकी संख्या आमतौर पर कम से कम 19 होती है। लेकिन नवजात शिशुओं के लिए कम भी हो सकती है।
  • सभी इलेक्ट्रोड कंप्यूटर की तारों से जुड़े होते हैं।
  • इलेक्ट्रोड मस्तिष्क के अंदर कोशिकाओं की विद्युत आवृत्ति की निगरानी करते हैं।
  • तब  कंप्यूटर पर रिकॉर्डिंग को तरंगों के रूप में ˈप्रॉजे᠎̮क्‍ट्‌ किया जाता है।

इसकी प्रक्रिया ईईजी के प्रकार के आधार पर भिन्न हो सकती है।

ईईजी टेस्ट की अवधि:-

एइलेक्ट्रोड (electrodes) को सिर की त्वचा और बाल पर रखा जाता है और पूरा सेटअप एक कंप्यूटर से जोड़ दिया जाता है। इस प्रक्रिया को आमतौर पर पूरा होने में एक घंटा लगता है। इस दौरान अधिकांश समय रोगी की आंखें बंद रहती हैं। यह वास्तव में आसान और त्वरित प्रक्रिया होती है। यह वास्तव में एक आसान और त्वरित प्रक्रिया है, अगर इसे पिछले दौरे से 24-48 घंटों के भीतर किया जाता है।

ईईजी टेस्ट के बाद क्या अपेक्षा करें:-

ईईजी परीक्षण पूरा होने के बाद, तकनीशियन रोगी के सिर पर रखे इलेक्ट्रोड को निकाल देगा। और रोगी को अपने सिर पर लगी चिपचिपी सामग्री को हटाना होगा जिसका उपयोग इलेक्ट्रोड को चिपकाने के लिए किया गया था।

इस प्रक्रिया में रोगी को ठीक होने में समय लेने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। क्योंकि इसके परीक्षण के समय कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती है। और रोगी परीक्षण पूरा होते ही घर वापस जा सकता है। रोगी को सलाह दी जाती है कि वह घर वापस ड्राइव करके ना जाए क्योंकि ऐसा करने से दौरा पड़ने की संभावना हो सकती है। घर आने के बाद, रोगी को आराम करना चाहिए और कोई ज़ोरदार गतिविधि नहीं करनी चाहिए।

ईईजी के प्रकार:-

सामान्य ईईजी (Routine EEG)

इस टेस्ट को करने में करीब 20-40 मिनट का समय लगता है। नियमित ईईजी परीक्षण के दौरान, तकनीशियन या चिकित्सक रोगी को चुपचाप बैठने के लिए कह सकते हैं। रोगी को अपनी आँखें बार-बार बंद करने या खोलने के लिए भी कहा जा सकता है।, इस प्रक्रिया के दौरान कुछ मिनटों के लिए गहरी साँसें लेनी होती है। (हाइपरवेंटिलेशन) , या यहाँ तक कि इंद्रियों को उत्तेजित करने के लिए रोगी के सामने टिमटिमाती रोशनी भी रख सकते हैं। इससे रोगी को थोड़ी परेशानी हो सकती है लेकिन यह हानिकारक नहीं है।

स्लीप ईईजी (Sleep EEG)

इसकी आवश्यकता तब हो सकती है जब नियमित ईईजी पर्याप्त जानकारी नहीं देता है। या नींद संबंधी समस्याओं के मामलों में रोगी को सलाह दी जा सकती है। कि वह रात को पहले जगे रहें ताकि वे परीक्षण के दौरान आसानी से सो सकें। नींद लाने के लिए शांति देनेवाली औषधि भी दी जा सकती हैं।

वीडियो ईईजी (VIDEO EEG)

इसे वीडियो टेलीमेट्री (video telemetry) के रूप में भी जाना जाता है। इस परीक्षण में, मस्तिष्क गतिविधि के बारे में अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए ईईजी रिकॉर्डिंग के साथ-साथ रोगी की एक वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है। यह परीक्षण आमतौर पर कई दिनों तक रिकॉर्ड किया जाता है। ईईजी सिग्नल वायरलेस तरीके से कंप्यूटर में ट्रांसफर किए जाते हैं। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग कंप्यूटर पर भी उपलब्ध होती है। और एक ट्रेन्‌  प्रोफेशनल की निरंतर निगरानी में है।

एंबुलेटरी ईईजी (AMBULATORY EEG)

ये दिमाग के पूरे दिन और पूरी रात की रिकॉर्डिंग एक दिन या उससे अधिक समय में रिकॉर्डिंग करता है। इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रोड एक पोर्टेबल रिकॉर्डर से जुड़े होते हैं। जिसे रोगी के कपड़ों से चिपकाया जा सकता है। रोगी के कपड़ों पे लगे इलेक्ट्रोड के साथ अपना दिन हमेशा की तरह जारी रख सकता है। लेकिन उसे कपडो पे लगे उपकरण को गीला करने की अनुमति नहीं होती  है।

इनवेसिव ईईजी टेलीमेट्री (INVASIVE EEG TELEMETRY)

यह प्रक्रिया बहुत कम उपयोग की जाती है। क्योंकि इसमें दौरे का एकदम सही पता लगाने के लिए इलेक्ट्रोड को सीधे मस्तिष्क पर रखने के लिए सर्जरी की जाती है। यह मिर्गी जैसे जटिल मामलों में किया जाता है।

ईईजी टेस्ट की सावधानियां :-

  • परीक्षण के दिन कैफीन के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि इससे परीक्षण के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
  • अपनी निर्धारित दवा तब तक जारी रखें जब तक कि डॉक्टर ने रुकने का सुझाव न दिया हो।
  • परीक्षण से पहले आपको अपने बालों को ठीक से धोना और साफ करना चाहिए।
  • परीक्षण से पहले बालों में उत्पादों जैसे जैल, तेल या कंडीशनर का प्रयोग न करें क्योंकि यह आपके बालों को गैर-चिपचिपा बना सकता है, और इलेक्ट्रोड को आपके सिर से चिपकने में कठिनाई हो सकती है।

ईईजी टेस्ट के जोखिम:-

  • ईईजी परीक्षण मुख्य रूप से कोई जोखिम पैदा नहीं करते हैं। इलेक्ट्रोड को सिर्फ मस्तिष्क के अंदर चल रही गतिविधि को रिकॉर्ड करने के लिए रखा जाता है। और इससे कोई महत्वपूर्ण असुविधा नहीं होती है। चूंकि यह परीक्षण गैर-इनवेसिव है, इसलिए इसका संचालन करना सुरक्षित है।
  • हाइपरवेंटिलेशन (तेजी से गहरी सांस लेने के लिए) जो आमतौर पर ईईजी में असामान्यताएं पैदा करने के लिए कुछ रोगियों में प्रेरित होता है,यह स्ट्रोक (stroke), सिकल सेल (sickle cell) एनीमिया या अस्थमा के इतिहास वाले रोगियों में सुरक्षित नहीं हो सकता है।
  • चमकती रोशनी या अन्य कारकों के कारण कुछ रोगियों में दौरे का खतरा हो सकता है, लेकिन इसे परीक्षण करने वाले प्रोफेशनल द्वारा आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है।

परिणाम

इसका परिणाम आमतौर पर ईईजी परीक्षण से कुछ दिनों के बाद आता है। ईईजी परीक्षण की रीडिंग का अध्ययन एक न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है जो किसी भी असामान्य रीडिंग की जांच कर सकता है। 8 हर्ट्ज और उससे अधिक की आवृत्ति वाला कोई भी परिणाम किसी भी ईईजी परीक्षण के सामान्य परिणामों के अंतर्गत आता है। ईईजी की मदद से मस्तिष्क के उस विशिष्ट क्षेत्र का भी पता लगाया जा सकता है। जहां असामान्यता है। परिणामों के आधार पर, एक डॉक्टर एमआरआई मस्तिष्क की सिफारिश भी कर सकता है।

सैम्पल रिपोर्ट

सैम्पल रिपोर्ट
सैम्पल रिपोर्ट

निष्कर्ष

ईईजी परीक्षणों का अनुप्रयोग पिछले कुछ वर्षों में विस्तृत हुआ है। इसका इतिहास WW2 में वापस देखा जा सकता है, जब पायलटों को जब्ती होने की संभावना के आधार पर अंदर और बाहर दिखाया गया था। तब ईईजी परीक्षण एक मिलीसेकंड तक के परिवर्तनों का पता लगा सकते थे, और क्लीनिकल ​​क्षेत्र में उनकी उपयोगिता पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है। सीटी स्कैन हेड (CT scan head)  या एमआरआई ब्रेन ( MRI brain)  जैसी अन्य डायग्नोस्टिक तकनीकें हैं, जिन्हें डॉक्टर ईईजी के निष्कर्षों को आगे बढ़ाने के लिए सुझा सकते हैं।

पूछे जाने वाले प्रश्न:-

ईईजी किस अव्यवस्था का पता लगा सकता है?

ईईजी मुख्य रूप से मिर्गी का पता लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है जो एक असमान्य दौरा है। यह दौरे के प्रकार और इसके ट्रिगरिंग कारकों को निर्धारित करने में मदद कर सकता है जिससे डॉक्टर रोग का बेहतर प्रबंधन कर सके।

क्या ईईजी कष्टदायक है?

नहीं। ईईजी एक गैर-इनवेसिव और दर्द रहित प्रक्रिया है। इलेक्ट्रोड कोई उत्तेजना पैदा नहीं करते हैं इसलिए इससे कोई असुविधा नहीं होती है।

ईईजी टेस्ट में कितना समय लगता है?

ईईजी परीक्षण में आमतौर पर 30-60 मिनट लगते हैं। प्रक्रिया आवश्यकताओं के आधार पर कुछ ईईजी परीक्षणों में अधिक समय लग सकता है।

क्या मैं ईईजी टेस्ट से पहले खा सकता हूं?

हां, ईईजी जांच से पहले आप सामान्य रूप से खा सकते हैं। हालांकि, परीक्षण से लगभग 8-10 घंटे पहले, कृपया कैफीन से बचें।

ईईजी टेस्ट के परिणाम में कितना समय लगता है?

चूंकि ईईजी टेक्नोलॉजिस्ट द्वारा मौके पर नहीं पढ़ा जा सकता है, लेकिन एक न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा इसका विश्लेषण करने की आवश्यकता है, इसमें आपके डायग्नोस्टिक सेंटर और शहर के आधार पर 2-7 दिनों के बीच कुछ भी लग सकता है। कुछ मामलों में परिणाम 48 घंटे से कम समय ले सकते हैं।

असामान्य ईईजी का क्या अर्थ है?

एक असामान्य ईईजी मस्तिष्क के कुछ क्षेत्र में असामान्य गतिविधि का संकेत देता है। यह मिर्गी, स्ट्रोक,(stroke) नींद, अव्यवस्था, डिमेंशिया (epilepsy) इत्यादि जैसी स्थितियों के कारण हो सकता है।

ईईजी टेस्ट कैसे बुक करें?

ईईजी टेस्ट कैसे बुक करें
ईईजी टेस्ट कैसे बुक करें
Dr Garima Saroj

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp

Copyright © 2026 All Rights Reserved.

EEG Test in Hindi: कीमत, उद्देश्य, प्रक्रिया & रिपोर्ट